शिवराज्याभिषेकाच्या निमित्ताने:
कुम्भकन्न असूर
औतारि अवरंगजेब
कीन्ही कत्ल मथुरा
दोहाई फेर रब की॥
खोदी डारे देवी देव
सहर महल्ला बाँकेअ
लाखन तुरुक कीन्हे
छूटि गयी तब की॥
भूषण भनत भाग्यो
कासीपति विश्वनाथ
और कौन गिनतीमे
भूली गति भबकी॥
चारो वर्ण धर्म छोडि
कलमा निवाज पढि
सिवाजी न होतो तो
सुनति होत सबकी॥
Monday, June 7, 2010
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